
अदरक के चिकित्सकीय गुणों की जानकारी पुरातन चिकित्सा पद्धति में भी मिल जाएगी। खूबसूरती और सेहत के लिए फायदेमंद अदरक के गुणों पर डालते हैं एक नजर।
पेट की बीमारियों के लिए रामबाण: पेट दर्द समेत पाचन संबंधी कई समस्याओं के लिए अदरक रामबाण औषधि है। महिलाओं को माहवारी के वक्त होने वाले असहनीय दर्द से भी निजात दिलाता है। इसमें पेट को साफ करने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने, रक्त के थक्के जमने से रोकने, एंटी फंगल और कैंसर प्रतिरोधी गुण भी पाए जाते हैं।
मॉर्निग सिकनेस: ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं के अनुसार अदरक गर्भवती महिलाओं को होने वाली मार्निग सिकनेस (चक्कर आना, उल्टियां होना आदि) से भी निजात दिलाता है।
अपच: यदि आप बदहजमी की समस्या से जूझ रहे हैं तो रोज सुबह उठकर अदरक का एक छोटा टुकड़ा खाएं। नियमित रूप से ऐसा करने से आपको बदहजमी नहीं होगी।
सीने में जलन: सीने में जलन की शिकायत हो तो अदरक चबाना शुरू कर दें। इससे आपको आराम मिलेगा।
मोशन सिकनेस: जर्मनी के विशेषज्ञों के अनुसार अदरक सबसे अचूक असर वाली हर्बल औषधि है। लैनसेट में हुए एक शोध के अनुसार मोशन सिकनेस को रोकने में अदरक अन्य दवाओं से ज्यादा असरकारक है। इसके अलावा अदरक गले की खराश जैसी समस्या में भी राहत प्रदान करता है।
दर्द मिटाए चुटकी में..: अदरक की सबसे अहम खूबियों में इसे गिना जाता है। 'फूड्स दैट फाइट पेन' पुस्तक के लेखक ऑर्थर नील बर्नार्ड के मुताबिक अदरक में दर्द मिटाने के प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं। यह बिना साइड इफेक्ट के किसी दर्दनिवारक दवा की तरह दर्द से निजात दिलाता है।
नैचुरल प्रिजरवेटिव: अदरक में प्राकृतिक रूप से किसी भी चीज को प्रिजर्व करने के गुण पाए जाते हैं। नाइजीरिया में हुए एक टेस्ट टयूब शोध के अनुसार अदरक का सत्व सालमोनेला नामक जीवाणु को खत्म करने में काफी असरकारक है। सालमोनेला किसी भी प्रिजर्व किए खाद्य पदार्थ को खराब कर देता है।
फैट कम करने में सहायक: अदरक का यह गुण निश्चित रूप से मोटापे के शिकार व्यक्तियों के लिए राहत देने वाला है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी के अनुसार अदरक का सेवन कैलोरी को बर्न करने में मददगार है। हालांकि इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि अदरक कुछ हद तक ही फैट को बर्न करता है।
खूबसूरती बढ़ाए: अदरक त्वचा को ग्लो करने में मदद करता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी स्किन हमेशा के लिए जवां बनी रहे तो सुबह उठकर खाली पेट एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा खाएं।
अदरक को आप फल-सब्जी मानें या फिर विलक्षण दवा कह लें, यह गुणों की खान है। अधिकतर घरों में अदरक का उपयोग तरह-तरह से किया जाता है। भोजन के एक महत्वपूर्ण अंग और औषधि, दोनों रूपों में अदरक या सोंठ का प्रयोग किया जाता है। विशिष्ट गुणों से भरपूर अदरक का इस्तेमाल कई बड़ी-छोटी बीमारियों में भी किया जाता है। औषधि के रूप में इसका प्रयोग गठिया, र्यूमेटिक आर्थराइटिस (आमवात) साइटिका और गर्दन व रीढ़ की हड्डियों की बीमारी (सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस) होने पर किया जाता है। जोड़ों की इन बीमारियों के अतिरिक्त भूख न लगना, अमीबिक पेचिश, खाँसी, जुकाम, दमा और शरीर में दर्द के साथ बुखार, कब्ज होना, कान में दर्द, उल्टियाँ होना, मोच आना, उदर शूल और मासिक धर्म में अनियमितता होना इन सब रोगों में भी अदरक (सोंठ) को दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।ऐसे रोगियों के लिए अदरक का इस्तेमाल आप घर पर ही दवाई बना सकते है। * ताजे अदरक को पीसकर कप़ड़े में डाल लें और निचोड़कर रस निकालकर रोगी को पीने को दें। * अदरक का काढ़ा व चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल किया जाता है। * काढ़ा बनाने के लिए सूखे अदरक का चूर्ण बनाकर 15 ग्राम (लगभग तीन चाय के चम्मच) एक प्याला पानी में मिलाकर उबालें। जब पानी एक-चौथाई रह जाए तो इसे छानकर रोगी को पिला दें।* चूर्ण बनाने के लिए सौंठ की ऊपर की परत को छीलकर फेंक दें और शेष भाग को पीसकर चूर्ण बना लें। इसको यदि छान लिया जाए तो चूर्ण में रेशे अलग हो जाते हैं। उन्हें फेंक दें। यह चूर्ण शहद के साथ मिलाकर रोगी को खाने के लिए दिया जाता है।* लेप बनाते या पीसते समय अदरक के साथ थोड़ा पानी मिला लें। * ताजे अदरक को पीसकर दर्द वाले जोड़ों व पेशियों पर इसका लेप करके ऊपर से पट्टी बाँध दें। इससे उस जोड़ की सूजन व दर्द तथा माँसपेशियों का दर्द भी कम हो जाता है।
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* लेप को यदि गर्म करके लगाया जाए तो इसका असर जल्दी होता है।* अगर किसी व्यक्ति को खाँसी के साथ कफ भी हो गया हो तो उसे रात को सोते समय दूध में अदरक डालकर उबालकर पिलाएँ। यह प्रक्रिया करीबन 15 दिनों तक अपनाएँ। इससे सीने में जमा कफ आसानी से बाहर निकल आएगा। इससे रोगी को खाँसी और कफ दोनों आराम भी महसूस होगा। रोगी को अदरक वाला दूध पिलाने के बाद पानी न पीने दें। * रोजमर्रा बनाई जाने वाली सब्जियों में अदरक का उपयोग अच्छा होता है। इससे शरीर के होने वाले वात रोगों से मुक्ति मिलती है।
रक विश्व औषधि के नाम से जानी जाती है। अदरक शक्ति और स्फूर्ति का भंडार माना जाता है। इसके उपयोग की जानकारी हो तो यह अनमोल है। अदरक के सूखने पर इसे सोंठ कहते हैं, ये दोनों ही रूप में हमारे लिये बलवर्धक है। यह जनाना तथा मर्दाना दोनों के लिये अत्याधिक उपयोगी है।सर्दी, जुकाम, खांसी, कफ, दमा में अदरक फायदा करता है। अदरक को जो किसी न किसी रूप में सेवन करता है वह हृदय रोग से दूर रहता है। शुगर तथा डायबिटीस को कंट्रोल करती है अदरक। अदरक, नींबू, सेंधा नमक हमें कैंसर से बचाता है। जुकाम से नाक बंद हो जाये, टॉन्सिल, बहरापन तथा कान बहने जैसे रोगों में अदरक का सेवन करें। इसी प्रकार अदरक तमाम परेशानी दूर करता है।अरूचि- यदाकदा भोजन के प्रति अरूचि पैदा हो जाती तो अदरक का रस और 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटें।उंघना- पूरी नींद लेने के बाद भी काम के दौरान उंघना नींद आना जैसी परेशानी सताये तो सोंठ चूर्ण एक चुटकी चाय के खौलते पानी में डाल दें। तथा सर्दियों में धूप में बैठकर धीरे-धीरे पिये नींद भाग जायेगी। ये उंघना नींद शरीर में अम्लता के बढ़ जाने से होती है। यह हर समय नींद आना या उंघना जैसी एक बीमारी है। शारीरिक कमजोरी- अदरक एक घरेलू औषधि है। सोंठ इसका सूखा रूप है। आजकल अदरक अधिक से अधिक खाने पीने की चीजों में इस्तमाल किया जाता है। अदरक में बहुतायत में पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जैसे प्रोटीन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, रेशा, अदरक। अदरक शरीर को चुस्त व स्वस्थ बनाता है। साथ-साथ स्मरण शक्ति बढ़ाता है। अधिक सर्दी के दिनों में शरीर को उष्मा देता है, शक्ति बनकर रोगों का निवारण करता है। अदरक आंतो के लिये एक पाचक टॉनिक जैसा है। सोंठ को घी, गुड़ में मिलाकर खाने से नई चेतना व शक्ति मिलती है। वृद्धावस्था में अधिकतर लोगों की पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है तो सोंठ का कवाथ लाभकारी होता है।हिचकी- ताजे अदरक का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से हिचकी जाती रहेगी।मुंह में बदबू- अदरक का रस 1 चम्मच गर्म पानी में डालकर कुल्ला करें। मुंह की दुर्गंध जाती रहेगी।लकवा तथा हाथ पैर सुन्न होना1. उड़द की दाल पीसकर उसे घी में सेकें। इसमें गुड़, सोंठ पीसकर मिला दें। लड्डू बनाये। इसे नित्य सुबह शाम खायें। सोंठ पाउडर व उड़द की दाल उबालकर इसका पानी पीने से लकवा ठीक होता है। हाथ पैर सुन्न होने पर- एक गांठ लहसुन की तथा सोंठ पानी के साथ पीस लें जो अंग सुन्न हो रहा हो उस पर इसका लेप करें। तथा बासी मुंह दो कली लहसुन की व जरा सी सोंठ चबायें। यह प्रयोग कम से कम दस बारह दिन तक करें अवश्य आराम मिलेगा।कान का दर्द ठंडी हवा या कान में मैल जमने से या फिर फुंसी होने से कान में दर्द हो तो अदरक का रस कपड़े से छानकर, गुनगुना कर तीन-चार बूंद कान में डालेंतीन चार बार। यदि कान में सांय-सांय कर रहा हो तो थोड़ा-थोड़ा सोंठ, गुड़, घी मिलकर खाने से ठीक हो जायेगा।सावधानी-गर्मी के दिनों में अदरक का प्रयोग न करें। अगर जरूरी हो तो बहुत कम मात्रा में करें कारण इसकी तासीर गर्म होती है। रक्त की उल्टी में अदरक का प्रयोग बिल्कुल न करें।जोड़ों पर दर्द-अदरक को पीसकर जोड़ों पर लेप करें। दर्द ठीक होगा।ढाई सौ ग्राम तिल के तेल में 500 ग्राम अदरक का रस मिलाकर पकाऐं जब सिर्फ तेल रह जाये तो उसे ठंडा कर शीशी में भर लें फिर संधि शोध(जोड़ों के दर्द) पर लगाऐं मालिश करें आराम आयेगा।
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